Thursday, May 29, 2008

चार धाम यात्रा कुछ सुझाव

मई का महीना आते ही उत्तरांचल में चार धाम यात्रा की शुरुआत हो जाती है। चार धाम में यमुनोत्री, गंगोत्री, केदरनाथ, और बद्रीनाथ धाम आते हैं। हर साल लाखों की संख्या में यात्री यहां दर्शन करने के लिए आते हैं। आप सब की सहायता के लिए चार धाम यात्रा से जुडी कुछ जरुरी बातें ।

चारों धामों की यात्रा हरिद्वार से करने पर आने जाने में करीब पन्द्रह सौ किलोमीटर का सफ़र करना होगा। इस यात्रा में करीब नौ दिन लगते हैं। यात्रा के लिए टैक्सी हरिद्वार से ली जा सकती है।

चार धाम के दर्शन एक ही यात्रा में करने पर धार्मिक आधार पर पहले यमुनोत्री फिर गंगोत्री उसके बाद केदारनाथ और आखिर में बद्रीनाथ जाया जाता है ।

दो धाम की यात्रा करने पर करीब आठ सौ किलोमीटर का सफर तय करना होगा। इसमे करीब पांच दिन लगते हैं। सभी धाम तीन हजार मीटर से ज्यादा की उँचाई पर हैं इसलिए साथ में ऊनी कपडे जरुर रखें।

यमुनोत्री के लिए ग्यारह किलोमीटर का पैदल सफर करना होगा। गंगोत्री तक जाने के लिए सडक मार्ग बना हुआ है। केदारनाथ के लिए चौदह किलोमीटर का पैदल सफर करना होता है। जो कि गौरीकुंड से शुरु होता है। बद्रीनाथ के लिए गाडी से जाया जा सकता है।

टैक्सी हरिद्वार से ले सकते हैं।

अलग अलग गाडियों के लिए एक दिन की किराया सूची

इंडिका - १८०० रुपये

टेवेरा - २३०० रुपये

क्वालिस - २३०० रुपये

स्कोर्पियो- २४०० रुपये

इनोवा - २८०० रुपये

सूमो - २१०० रुपये

ये एक दिन का किराया है जिसमें ईंधन, टोल टैक्स और पार्किंग शुल्क शामिल हैं। मैने आपके अधिकतम किराया बताया है । खास बात ये है कि रोज की मांग के हिसाब से किराया कम या ज्यादा होता रहता है।

मैने जिस टूर कम्पनी से गाडी ली थी उसका फोन नमंबर 09410350875 है। यहां आप अनिल चौधरी से सम्पर्क कर गाडी ले सकते हैं।

Monday, May 26, 2008

देखिए खूबसूरत भूटान को

भूटान की यात्रा की मेरे पत्रकार मित्र नीरज सिंह ने। वे वहां प्रधानमंत्री के साथ गये थे। लेकिन उन्होने इसकी सुन्दरता को अपने कैमरे में उतारा है । उसके कुछ चित्र आपको भूटान को जानने में मदद करेंगें।




चाय बागन
थिम्पू का नजारा
हिमालय की गोद में बसा है छोटा सा खूबसूरत देश भूटान। इस देश को भगवान ने अद्भुत सुन्दरता दी है। प्रकृति की अनछुई सुन्दरता को भूटान आकर महसूस किया जा सकता है। नैसर्गित सुन्दरता के धनी इस देश ने बडी ही मेहनत से अपनी सभ्यता और संस्कृति संवार कर रखा है। एक दिव्यता है जो यहां चहुँ और बिखरी है।

Saturday, May 24, 2008

पर्यावरण के अनुकूल टाईल्स का प्रयोग करें




आज हमारे शहरों में पीने के पानी की कमा होती जा रही है। जमीन के नीचे का पानी इतनी तेजी से निकाला जा रहा है कि भू जल कम होता जा रहा है। जमीन के नीचे पानी की कमी को पूरा किया जा सकता है अगर सही तरीके से वर्षा के पानी को जमीन के नीचे पहुँचाया जा सके।
ये समस्या हमारे शहरों में कुछ ज्यादा ही देखी जा रही है क्योंकि यहां पानी जमीन के नीचे नहीं जा पाता है। यहां हर तरफ तारकोल की सडकें और पक्के फर्श हैं जिसके कारण पानी जमीन में ना जा कर बह जाता है। इस समस्या एक समाधान है पर्यावरण के अनुकूल टाइलस का इस्तेमाल ।
इन टाईल्स को सडकों के किनारे बने फुटपाथ और घरों के खुली जगहों पर प्रयोग किया जा सकता है।इनकी खासियत ये है (जैसा कि आप फोटो में भी देख रहें हैं) इन टाईल्स को पूरा पक्का ना बनाकर इनके बीच में जगह छोडी जाती है।
इस खाली जगह में से पानी आसानी से जमीन के नीचे जा सकता है। इस तरह की टाईल्स का इस्तेमाल शुरु हो गया है लेकिन अभी बडी ही कम जगहों में इसे प्रयोग में लाया जा रहा है। अब अगर आप को भी घर के बाहर पक्का फर्श बनवाना हो तो इनका इस्तेमाल कर पर्यावरण को बचाने में सहयोग दें।

Friday, May 23, 2008

नैनीताल के पास खूबसूरत झरना कार्बेट फाल



नैनीताल के पास एक बहुत ही खूबसूरत झरना है । इसको कार्बेट फाल कहा जाता है। यह जिम कार्बेट नेशनल पार्क के इलाके में ही पडता है। आप नैनीताल से वापसी के रास्ते में इसे आसानी से देख सकते हैं।

नैनीताल से लगभग ३० किलोमाटर की दूरा पर है कालाढूँगी। कालाढूँगी से ही नैनीताल की चढाई भी शूरू होती है। दरअसल नैनीताल जाने के दो रास्ते हैं जिसमें से एक हल्द्वानी होकर है और दुसरा कालाढूँगी से ।

कालढूँगी से रामनगर जाने वाली सडक पर लगभग सात आठ किलोमीटर दूर है ये शानदार झरना। इसको देखने के लिए सडक से करीब दो किलोमी़टर अंदर जाना होगा। ये रास्ता घने जंगल से होकर जाता है। रास्ते पर चलना अपने आप में रोमांच से कम नहीं है। अंदर तक गाडी भी ले जाई जा सकती है।

उंचाई से गिरते इस झरने को देखकर सफर की सारी थकान मिट सी जाती है। झरने के ठंडे पानी में नहाने का अपना ही मजा है। यहां आकर मन को असीम शांति महसूस होती है। घने जंगल के बीच तरह तरह के पक्षियों की आवाजें आपका मन मोह लेती है। कुछ घंटे की पिकनिक के लिए ये बडी ही अच्छी जगह है।

यहा पर आये तो इस बात का ध्यान रखें की ये जंगल का इलाका है इसलिए अगर खाने पीने का समान साथ ला रहे हैं तो बाद में यहा ना छोडें। प्लास्टिक की थैलिया अपने साथ ही वापस ले आयें।

तो अगली बार नैनीताल जा रहे तो यहा पर जाना ना भूलें।

Thursday, May 22, 2008

एक कविता

अभी मेरे दोस्त नें एक कविता सुनाई देश के हालात को साफ बयां करता हैं। ये तो पता नही है कि किसने लिखी लेकिन आप भी पढिये।

मेरा पहला लडका डाक्टर होकर बीमार हो गया,

मेरा दूसरा लडका इंजीनियर होकर बेकार हो गया,

मेरा तीसरा लडका आईएएस होकर लाचार हो गया,

मेरा चौथा लडका नालायक लडका नेता बनकर देश का कर्णधार हो गया।

Monday, May 19, 2008

नैनीताल की ताजा तस्वीरें देखिए.....


नैनीताल की भीड़
अभी नैनीताल गया था एक ही दिन के लिए। एक दिन मैं ही दिल्ली की गर्मी से तो सुकून मिल ही गया। पहले ही अपने जनवरी के चिट्ठे में नैनीताल के बारे में लिख चुका हूँ। इसलिए ज्यादा नहीं लिख रहा हूँ बस आप ताजा फोटो देखिए।




एक और तरफ़ से नैनीताल झील




माल रोड


झील की खूबसूरती


नैनीताल झील

Saturday, May 17, 2008

जयपुर

नमन श्रद्धाजंलि