Tuesday, August 5, 2008
मुसाफिर की सफाई
पिछला पोस्ट बिना टेक्स्ट के चला गया, गुनहगार -सा महसूस कर रहा हूं। लेकिन सच तो ये है कि तकनीकी नॉलेज में लिद्दड़ होना और ऐन वक्त पर अभिकलित्र यानी कंप्यूटर के धोखे की वजह से ऐसा हुआ। फिर अपने एक भाई की मदद से तस्वीरें लोड करनी चाहीं तो पोस्ट पब्लिश हो गईँ।
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