अभी मेरे दोस्त नें एक कविता सुनाई देश के हालात को साफ बयां करता हैं। ये तो पता नही है कि किसने लिखी लेकिन आप भी पढिये।
मेरा पहला लडका डाक्टर होकर बीमार हो गया,
मेरा दूसरा लडका इंजीनियर होकर बेकार हो गया,
मेरा तीसरा लडका आईएएस होकर लाचार हो गया,
मेरा चौथा लडका नालायक लडका नेता बनकर देश का कर्णधार हो गया।
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5 comments:
शब्द बहुत ही सहज है इस छोटी सी कविता के लेकिन इसका ममॻ बहुत गहरा...
नेता के रुप में मीडिल क्लास वालों के लिए अपना करियर बनाना ..आइएएस , डाक्टर और इंजीनियर से कहीं ज्यादा टफ और रिस्की है। लेकिन आपकी कविता तथ्यपरक और सच्चाइ के इदॻ गिदॻ है। शुक्रिया ..
बिल्कुल सटीक कविता..
बिल्कुल हकीकत है जी ।
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हँसे या रोयें?
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