Thursday, May 22, 2008

एक कविता

अभी मेरे दोस्त नें एक कविता सुनाई देश के हालात को साफ बयां करता हैं। ये तो पता नही है कि किसने लिखी लेकिन आप भी पढिये।

मेरा पहला लडका डाक्टर होकर बीमार हो गया,

मेरा दूसरा लडका इंजीनियर होकर बेकार हो गया,

मेरा तीसरा लडका आईएएस होकर लाचार हो गया,

मेरा चौथा लडका नालायक लडका नेता बनकर देश का कर्णधार हो गया।

5 comments:

कुमार आलोक said...

शब्द बहुत ही सहज है इस छोटी सी कविता के लेकिन इसका ममॻ बहुत गहरा...
नेता के रुप में मीडिल क्लास वालों के लिए अपना करियर बनाना ..आइएएस , डाक्टर और इंजीनियर से कहीं ज्यादा टफ और रिस्की है। लेकिन आपकी कविता तथ्यपरक और सच्चाइ के इदॻ गिदॻ है। शुक्रिया ..

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

बिल्कुल सटीक कविता..

हरिमोहन सिंह said...

बिल्‍कुल हकीकत है जी ।

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संजय बेंगाणी said...

हँसे या रोयें?